Initial Public Offering ( IPO ) – आईपीओ क्या है।

Initial Public Offering ( IPO ) क्या है ? और इसमें कैसे इनवेस्ट किया जाता है। इसके बारे में हम यहाँ विस्तार से बात करेंगे।

शेयर बाजार (Share Market) अनिश्चितताओं से भरा बाजार (Market) है। बाजार की चाल एक पल में कुछ और होती है। तो दूसरे ही पल स्टॉक मार्केट का अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

आप भी अक्सर स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टिंग (Investing) के बारे में जरूर सोचते होंगे, लेकिन फिर आपको लगता होगा कि आख़िर कैसे शेयर बाजार में इनवेस्ट किया जाए ?

दरअसल शेयर बाजार में इन्वेस्टिंग की कोई ज्यादा मुश्किल प्रक्रिया नहीं है। बस आपको थोड़ा पढ़ना होगा और शेयर बाजार पर नज़र रखने की आदत ड़ालनी होगी।

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टिंग दो तरीकों से की जाती है।

प्राइमरी मार्केट – Primary Market

प्राइमरी मार्केट में आप आईपीओ के जरिए इनवेस्ट करते हैं।

सेकेंडरी मार्केट – Secondary Market

सेकंड्री मार्केट में सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट में लिस्टिड शेयर में इनवेस्टिंग की जाती है।

आईपीओ (IPO) के बारे में आसान भाषा में समझते हैं।

आख़िर क्या है आईपीओ – What is IPO

आईपीओ को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) (सार्वजनिक प्रस्ताव) कहते हैं।

दरअसल जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को ऑफर करती है तो इसे आईपीओ (IPO) कहते हैं।

इस प्रक्रिया में कंपनियां अपने शेयर आम लोगो को ऑफर करती है। और यह प्राइमरी मार्केट के अंतर्गत होता है।

अगर ज्यादा साधारण तरह से जानना है तो कहेगें कि आईपीओ (IPO) के जरिए कंपनी फंड इकट्ठा करती है। और उस फंड को कंपनी की तरक्की में खर्च करती है।

बदले में आईपीओ खरीदने वाले लोगों को कंपनी में हिस्सेदारी मिल जाती है।

मतलब जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते है तो आप उस कंपनी के खरीदे गए हिस्से के मालिक होते हैं।

एक कंपनी एक से ज्यादा बार भी आईपीओ (IPO) ला सकती है।

आमतौर पर कंपनियां कई कारणों से आईपीओ लाती है। इन कारणों को भी विस्तार से जानते हैं।

आईपीओ लाने के कारण – Reasons to bring IPO

विस्तार के लिए – To Expand

जब किसी कंपनी को लगता है कि वह लगातार आगे बढ़ रही है।

और उसे ज्यादा विस्तार की जरूरत है यानि अब कंपनी को दूसरे शहरों में भी विस्तार करना है और इसके लिए उसे लोगों की भी जरूरत है।

तो इस स्थिति में कंपनी आईपीओ (IPO) जारी करती है।

कंपनी के विस्तार के लिए वैसे तो वह बैंक लोन का सहारा भी ले सकती है, लेकिन बैंक लोन को कंपनी को एक निश्चित समय पर निश्चित ब्याज के साथ लौटाना भी होता है।

जबकि अगर कंपनी आईपीओ (IPO) के जरिए फंड इकट्ठा करती है। तो उसे किसी को न तो वह पैसा लौटाना पड़ता है और न ही किसी तरह का ब्याज देना पड़ता है।

यह तो हुआ कंपनी का फायदा। अब आईपीओ (IPO) खरीदने वाले लोगों के फायदे की बात करते हैं।

जो भी इनवेस्टर आईपीओ (IPO) में इनवेस्ट करते हैं उन्हें उस खरीदे गए आईपीओ के बदले में कंपनी में कुछ प्रतिशत की हिस्सेदारी मिल जाती है।

यानि अगर किसी कंपनी ने कुछ शेयर आईपीओ के लिए निकाले हैं। और आपने उन शेयर्स का दो प्रतिशत हिस्सा खरीदा है तो आप उस कंपनी के दो प्रतिशत हिस्से के मालिक होते हैं।

इस तरह से आईपीओ से कंपनी और इनवेस्टर दोनों को फायदा होता है।

कर्ज कम करने लिए – To Reduce Debt

जब कंपनी ज्यादा कर्ज में होती है तो इस स्थिति में भी कंपनी आईपीओ जारी करती है।

ऐसे में कंपनी किसी बैंक से लोन लेकर कर्ज की भरपाई करने से बेहतर समझती है कि कंपनी के कुछ शेयर बेच दिए जाए और कर्ज का भुगतान किया जाए।

ऐसे में कंपनी के कर्ज का भी भुगतान हो जाता है और कंपनी को नए इनवेस्टर भी मिल जाते हैं। और इनवेस्टर को कंपनी में कुछ हिस्से का मालिक बनने का मौका भी मिल जाता है।

किसी नए प्रोडक्ट या सर्विस को लॉन्च के लिए – To Launch a New Product or Service

आईपीओ जारी करने की एक और वजह होती है। कंपनी द्वारा अपने नए प्रोडक्ट्स और सर्विस का लॉंच करना।

जब कभी कोई कंपनी किसी नए प्रोडक्ट्स या सर्विस की शुरूआत करती है। तो कंपनी चाहती कि उस सर्विस या प्रोडक्ट्स का प्रोमोशन हो और वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।

इसलिए कंपनी आईपीओ या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग जारी करती है।

आईपीओ के प्रकार – Types of IPO

आईपीओ (IPO) को दो तरह से बांटा जा सकता है। और इसे दो भागों में बांटने का कारण उसकी कीमतों का निर्धारण होता है।

फिक्स प्राइस इश्यू या फिक्स प्राइस आईपीओ – Fixed Price Issue or Fixed Price IPO

आईपीओ (IPO) जारी करने वाली कंपनी आईपीओ जारी करने से पहले इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ मिलकर आईपीओ के प्राईस के बारे में चर्चा करती है।

इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ मिटिंग में कंपनी आईपीओ का प्राईस डिसाइड करती है। उस फिक्स प्राईस पर ही कोई भी इन्वेस्टरआईपीओ को सबस्क्राईब कर सकते है।

आप केवल उसी प्राइस पर आईपीओ खरीद सकते हैं जो प्राईस निर्धारित किए गए है।

बुक बिल्डिंग इश्यू या बुक बिल्डिंग आईपीओ – Book Building Issue or Book Building IPO

इसमें कंपनी इनवेस्टमेंट बैंक के साथ मिलकर आईपीओ का एक प्राईस बैंड डिसाइड करती है।

जब आईपीओ की प्राईस बैंड डिसाइड हो जाती है उसके बाद ही इसे जारी किया जाता है। इसके बाद डिसाइड किए गए प्राईस बैंड में से इनवेस्टर अपनी बिड सबस्क्राईब करते हैं।

बुक बिल्डिंग आईपीओ के प्राईस बैंड में दो तरह के होते हैं।

  • प्राईस बैंड में अगर आईपीओ (IPO) का प्राईस कम है तो फ्लोर प्राईस (Price Floor) कहते हैं।
  • अगर आईपीओ (IPO) का प्राईस ज्यादा है तो इसे कैप प्राईस (Cap Price) कहते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि बुक बिल्डिंग आईपीओ में कैप प्राईस और फ्लोर प्राईस में 20% का अंतर रखा जा सकता है।

आईपीओ में इन्वेस्ट कैसे किया जाता है ? – How to invest in IPO ?

आईपीओ (IPO) क्या है और आईपीओ क्यो जारी किया जाता है यह सब तो जान लिया। अब जानते है कि आख़िर आईपीओ (IPO) में इन्वेस्ट कैसे कर सकते हैं ?

आईपीओ (IPO) जारी करने वाली कंपनी अपने आईपीओ (IPO) को इन्वेस्टर्स के लिए 3-10 दिनों के लिए ओपन करती है।

मतलब कोई भी आईपीओ जब आता है तो उसे कोई भी इन्वेस्टर 3 से 10 दिनों के भीतर ही खरीद सकता है।

कोई कंपनी अपने आईपीओ (IPO) जारी करने की अवधि सिर्फ 3 दिन भी रखती है तो कोई तीन दिन से ज्यादा रखती है।

आप इन निश्चित दिनों के भीतर की कंपनी की साईट पर जाकर या रजिस्टर्ड ब्रोकरेज (Registered Brokerage) के जरिए आईपीओ (IPO) में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

अब अगर आईपीओ (IPO) फिक्स प्राईस इश्यू है तो आपको उसी फिक्स प्राईस पर आईपीओ के लिए अप्लाई (Apply) करना होगा और अगर आईपीओ (IPO) बुक बिल्डिंग इश्यू है। तो आपको उस बुक बिल्डिंग इश्यू पर ही बिड लगानी होगी।

अलॉटमेंट प्रोसेस – Allotment Process

जब आईपीओ (IPO) ओपनिंग क्लोज हो जाती है तो कंपनी आईपीओ का अलॉटमेंट करती है। इस प्रोसेस में कंपनी सभी इन्वेस्टर्स को आईपीओ अलॉटमेंट (IPO Allotment) करती है।

और इन्वेस्टर्स को आईपीओ अलॉटमेंट (IPO Allotment) होने के बाद शेयर स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) में लिस्ट हो जाते हैं।

स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने के बाद शेयर सेकेंड्री मार्केट (Secondary Market) में खरीदे और बेचे जाते हैं। जब तक शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट नहीं होते हैं।

आप उन्हें नहीं बेच सकते हैं। एक बार जब स्टॉक मार्केट में शेयर लिस्ट हो जाते हैं तो पैसा और शेयर ये दोनों इन्वेस्टर्स के बीच एक्सचेंज होते रहते हैं।

एक बार लिस्ट होने के बाद स्टॉक मार्केट टाईमिंग (Timing) के हिसाब से आप शेयर बेच भी सकते हैं और खरीद भी सकते हैं।

ये सारा प्रोसेस सेबी ( SEBI – SECURITIES AND EXCHANGE BOARD OF INDIA ) की निगरानी में होता है।

कोई भी कंपनी जब अपना आईपीओ (IPO) लाने की योजना बनाती है तो उसे सेबी के सभी नियमों का पालन करना होता है।

उसे सेबी (SEBI) को आईपीओ लाने के कारणों से लेकर हर छोटी बड़ी बात से अवगत कराना होता है। कंपनी एक रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस सेबी को देती है।

इस रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस में कंपनी की निम्न लिखित टॉपिक होते है।

  • बिज़नेस डिलेट (BUSINESS DETAILS)
  • कैपिटल स्ट्रकचर (CAPITAL STRUCTURE)
  • रिस्क फैक्टर (RISK FACTOR)
  • रिस्क स्ट्रैटेजी (RISK STRATEGY)
  • प्रोमोटर्स एंड मैनेजमेंट (PROMOTORS AND MANAGEMENT)
  • पास्ट फाईनैंशियल डेटा (PAST FINANCIAL DATA)

यें सभी जानकारी होती है। रैड हैरिंग प्रोस्पेक्टस सेबी (SEBI- SECURITIES AND EXCHANGE BOARD OF INDIA) की वेबसाइट पर मिल जाता है।

हर कंपनी को सेबी के सभी नियमों और शर्तों को मानना जरूरी होता है।

  • किसी भी तरह की इन्वेस्टिंग से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखना चाहिए।
  • इन्वेस्टिंग से पहले कंपनी की बाकी कंपनियों के साथ भी तुलना कर लेनी चाहिए।
  • आईपीओ लाने वाली कंपनी के रैड हैरिंग प्रोस्पेक्टस को जरूर पढ़ना चाहिए।
  • सभी बातों को ध्यान में रख कर ही इन्वेस्टिंग करना सही विचार होता है।

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