Sources of Business Finance – व्यापार वित्त के स्रोत।

Sources of Business Finance – इस विषय में हम जानेंगे कि एक छोटे व्यापार को बढ़ाने के लिए उसके पास पूंजी के लिए क्या-क्या स्रोत होते है। और वो उनका कब कब और कैसे इस्तेमाल करते है।

हम यहाँ कौन कौन से वित्त के वैकल्पिक स्रोत (Alternative Sources of Finance) होते है उसके बारे में जानेंगे।

Business Funding अर्थात Business Finance का अर्थ है। – व्यापार की पूंजी (Business Capital)

Sources of Business Finance : Stage 1 – Promoters, Angel Investor

अगर आपने कभी बिज़नस करने का सोचा होगा तो आपके पास सबसे पहले एक बिज़नस आईडिया (Business Idea) आता है। आप जो बिज़नस करना चाहते है।

उसके बारे में आपको अनुभव भी है। और साथ ही साथ आपको बहुत भरोसा(Reliance) है कि आपका बिज़नस बहुत सफल होगा।

इस आईडिया के साथ आपकी सबसे बड़ी दिक्कत ये होगी कि आप इस बिज़नस करने के लिए पैसे यानी निधि(Fund) कहा से लायेंगे।

बिज़नस शुरु करने के लिए आपको एक जगह किराये(Rent) पर लेना होता है। कुछ रजिस्ट्रेशन(Registration), और Asset Finance Companies जैसे की मशीन(Machine) और फर्नीचर(Furniture) का प्रबंध करना होता है।

आपको और आदमी रखने की ज़रूरत होती है। और ये सब पूंजीगत व्यय(Capital Expense) होते है। और इसके लिए आपको पूंजी(Fund) चाहिए होती है।

ऐसे में आपको दो तरह की पूंजी (Fund) की आवश्यकता होती है –

  1. Fixed Capital – जो पूंजीगत(Capital) खर्चो के लिए लगने वाली पूंजी(Fund)।
  2. Working capital– आप जिस चीज का व्यापार करना चाहते है, उसको खरीदने(Buy) और बेचने(Sell) से सम्बंधित लगने वाली पूंजी(Fund)

अगर आप अपने आईडिया(Idea) को बिज़नस रूप देना चाहते है। तो आपको ख़ुद ही पूंजी(Fund) की व्यवस्था करनी होगी। क्योकि एक नया बिज़नस सफल होगा या नहीं। इस रिस्क(Risk) के कारण कोई भी जल्दी पैसा नहीं लगाना चाहता।

ऐसे में हो सकता है। आप अपने पास जो भी बचत के पैसे है। वह या अपने करीबी परिवार या रिश्तेदार से पैसे लेकर शुरू करे अगर आप इस तरह अपना बिज़नस शुरू करते है। तो आप जो भी कंपनी बनायेगे उसके प्रोमोटर कहलायेंगे।

Business Promoters (व्यापार प्रमोटर) :

ध्यान देने वाली बात है कि बिज़नस को शूरू करने वाले को प्रमोटर कहा जाता है। और ऐसे में जो आप अकेले ही इस बिज़नस को शुरू कर रहे है। और अपने ख़ुद की जोखिम पर पूंजी(Fund) लगा रहे है।

इसलिए आप भी इस बिज़नस के प्रमोटर कहे लाएँगे।

Angel Investor (एन्जल निवेशक) :

अब मान लीजिये कि अपने-अपने बिज़नस की पूंजी की कमी को पूरा करने के लिए अपने दोस्त को भी राजी कर लिया। और आपके वह दोस्त आपको बिज़नस फण्ड करने के लिए पैसे दे देते है।

तो ऐसे में बिज़नस फण्ड के बिलकुल शुरुआती दौर में आपके दोस्त द्वारा लगाया पैसा ऋण(Loan) नहीं बल्कि पूंजी के रूप में निवेशित किया जायेगा।

और आपके दोस्तों को एन्जल निवेशक( Angel Investor ) जाएगा।

Seed Fund Or Business Capital (सीड फंड या बिजनेस कैपिटल) :

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि आपने यानी Promoter और Angel Investor ने मिलकर जो प्रारंभिक पैसा(Initial Money) जुटाया है।

मान लीजिये Promoter और Angel Investor ने मिलकर 10 लाख रूपये एकत्रित किये। और इस 10 लाख से अब बिज़नस की शुरुआत हो जाती है।

तो ऐसे में प्रारंभिक पैसा(Initial Money) को व्यापार पूंजी(Business Capital) के रूप में प्रारम्भिक मूलधन(Seed Funding) माना जायेगा।

प्रारम्भिक मूलधन(Seed Funding) को कंपनी के नाम से कंपनी खाते में रखा जाता है। ना कि प्रोमोटर या किसी और के खाते में।

और जब पूरा प्रारम्भिक मूलधन(Seed Funding) कंपनी के अकाउंट में आ जाता है। तो अब उस पूंजी को शेयर पूंजी (Share Capital) कहा जाता है।

और उस प्रारम्भिक मूलधन(Seed Funding) लाने वालो को कंपनी में हिस्सेदारी (शेयर) का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है।

यानी अभी तक जो हमने प्रमोटर और एंजेल इन्वेस्टर की बात की उनको शेयर कैपिटल के आधार पर शेयर सर्टिफिकेट दे दिया जायेगा।

Share Capital (शेयर पूंजी) :

हमने देखा प्रोमोटर और एंजेल इन्वेस्टर ने बिज़नस की शुरुआत के लिए जो भी पूंजी लाई। उस प्रारम्भिक मूलधन कहा गया।

और जब प्रारम्भिक मूलधन को कंपनी के खाते में स्थानांतरण (Transfer) कर दिया तो या प्रारंभिक व्यापार निधि अब Share Capital (शेयर पूंजी) बन जाता है।

कंपनी के पास कुल शेयर पूंजी है – 10 लाख रूपये और प्रोमोटर और इन्वेस्टर ने मिलकर कंपनी की कुल पूंजी को 10 रूपये के अंकित मूल्य (Face Value) के शेयर को बाट देते है।

तो ऐसे में कुल शेयर की संख्या होती है – 1 लाख शेयर

और प्रत्येक शेयर का मूल्य 10 रूपये

और इस प्रकार कंपनी की कुल पूंजी(Fund) हो जाती है।

SHARE CAPITAL = 1,00,000 X 10

= 10,00,000 रूपये

 Company Valuation (कंपनी मूल्यांकन) :

ऐसे में अभी जब कंपनी के पास सिर्फ़ 10 लाख रूपये ही है और दूसरी कोई सम्पति नहीं है तो कंपनी का मूल्यांकन (Valuation) होगा–10 लाख रूपये।

मूल्यांकन (Valuation) = कुल सम्पति(Net Worth) – कुल दायित्व(Total Liability),

अभी कंपनी के पास कोई दायित्व नहीं है। सिर्फ़ 10 लाख रूपये है।

इस तरह एक कंपनी शेयर पूंजी(Share Capital) के साथ अपना बिज़नस करना शुरू करती है। और जैसे-जैसे कंपनी का लाभ(Profit) बढ़ता है।

तो उसकी सम्पति(Property) भी बढती है और इस तरह उस कंपनी की मूल्यांकन(Valuation) भी बढ़ने लगती है।

Authorized Shares (अधिकृत शेयर) :

हमने ऊपर जो 10 लाख के शेयर कैपिटल(Share Capital) को 10 रूपये के अंकित मूल्य (Face Value) के साथ विभाजन(Divide) किया था। तो कंपनी के पास कुल शेयर हो गए थे–1 लाख शेयर

अब इसी 1 लाख शेयर को कंपनी का अधिकृत शेयर (Authorized Shares) कहा जायेगा।

और अधिकृत शेयर (Authorized Shares) को कंपनी के प्रमोटरों और निवेशकों के बीच विभाजन(Divide) किया जायेगा।

ध्यान देने वाली बात ये है कि ज़रूरी नहीं कंपनी के कुल शेयर को प्रमोटरों और निवेशकों के बीच बाट दिया जाये, जैसे ज़रूरी नहीं सभी 1 लाख शेयर को दोनों के बीच विभाजन(Divide) किया जाये।

ऐसा भी हो सकता है कि प्रमोटरों को 40% शेयर और Angel Investors को 20% शेयर दिया जाये और बाकि 40 % कंपनी के खाते में रखा जाये।

Issued Shares (जारी शेयर) :

हमने देखा अधिकृत पूंजी(Authorized Capital) से 40% शेयर प्रमोटरों को और 20 % शेयर Angel Investors को दिया गया।

इस तरह कंपनी के 60% के शेयर को जो अधिकृत पूंजी(Authorized Capital) से निकाला गया है। इसे जारी शेयर(Issued Shares) कहा जाता है।

इसे आवंटित शेयर (Allotted Shares) भी कहा जाता है।

और जो अधिकृत (Authorized) शेयर कंपनी ने अपने पास रखे है, इस केस में 40% शेयर्स को फ़िलहालअधिकृत लेकिन आवंटित नहीं (Authorized but not Allotted) कहा जायेगा।

Shareholding Pattern (शेयरधारिता पैटर्न) :

शेयर होल्डिंग पैटर्न (Shareholding Pattern)से हमारा मतलब इस बात से है कि जारी शेयर(Issued Shares) कितने और किसके पास है। जैसे ऊपर के बताये उदाहरण की बात की जाये तो।

फ़िलहाल शेयरधारिता जारी करने की (Issue Shareholding) पैटर्न कुछ इस प्रकार होगी।

SR.NO OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTER40%
2ANGEL INVESTOR 20%

Sources of Business Finance : Stage 2 – Venture Capitalist

जैसे जैसे बिज़नस आगे बढ़ता है। और लाभ(Profit) कमाता है। तो कुछ साल बाद उस बिज़नस के मालिक प्रमोटर और निवेशक उस बिज़नस को और अधिक बढ़ाना चाहते है।

जैसे अगर प्रमोटर और निवेशक ने अगर भारत के किसी एक शहर में है। तो वह ये सोचता है कि अगर मैं अपनी कंपनी के शाखा (Branch) अपने राज्य के दुसरे शहरो में भी खोलू तो कंपनी को और अधिक फायदा होगा। और बिज़नस बढ़ जायेगा।

इसके लिए फिर से व्यापार वित्त पोषण (Business funding) की ज़रूरत होती है।

और व्यापार वित्त पोषण (Business funding) की आवश्यकता यानी पूंजी की आवश्यकता और पूंजी की इस तरह के आवश्यकता के लिए कंपनी को नए निवेशक(Investor) की ज़रूरत होती है।

जो कंपनी को अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए पैसे दे और बदले में होने वाले फायदों में उसे भी कुछ हिस्सा दिया जाये।

अब क्योकि कंपनी ने एक शहर में अपना बिज़नस जमा लिया है।

और लगातार लाभ कमा रही है। तो ऐसे में कंपनी को कुछ बड़े निवेशक मिलने की संभावना होती है। और वह एक नए निवेशक की तरफ बढ़ते है।

और जब उसे कोई बड़ा निवेशक मिल जाता है। जो कंपनी में शेयर के बदले निवेशक को तैयार हो जाता है।

इस मंच (Stage) पर निवेश करने वाले को उद्यम पूंजीपति (Venture Capitalist) कहा जाता है।

और संक्षेप में इस तरीके से आने वाली फंडिंग को VC (Venture Capitalist) फंडिंग कहा जाता है।

जब कोई नया निवेशक आता है। तो उस समय कंपनी की मूल्यांकन(Valuation) या कहे निवल मूल्य (Net Worth) निकाला जाता है।

और नए मूल्यांकन के हिसाब से नए निवेशक द्वारा किये जाने वाले निवेश के बदले उसे शेयर दिया जाता है।

अब मान लेते है। जो बिज़नस 10 लाख से 4 साल पहले शुरू हुआ था। उस की मूल्यांकन अभी 40 लाख हो चुकी है।

तो ऐसे में VC (Venture Capitalist) फंडिंग 40 लाख के अनुपात(Ratio) में जितना निवेश करेगा। उतना उसे शेयर दिया जायेगा।

यानी उस कंपनी में 10% शेयर के बदले VC Funding से 4 लाख रूपये आने चाहिए।

अब ऐसे ही कंपनी जब भी नया निवेशक से शेयर के बदले पैसा लेना होगा। तो उसे वर्तमान मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए शेयर इशू (Issue) कर सकता है।

VC की पहली निवेश को सीरीज A FUNDING, और दूसरी बार VC से निवेश लेने पर उसे नाम दिया जायेगा–सीरीज B FUNDING

जैसे ही कोई निवेशक निवेश करता है। तो शेयर होल्डिंग पैटर्न में कुछ नया या थोडा बदलाव देखने को मिलता है।

ध्यान देने वाली बात ये भी है। कोई पुराना निवेश अपने शेयर को कंपनी के वर्तमान मूल्यांकन(Valuation) के हिसाब से बेचकर बाहर भी निकल सकता है।

अगर हम जिस उदा. की बात कर रहे है। उसमे अधिकृत शेयर आवंटित नहीं (Authorized shares not allotted) से निकाल कर 10% शेयर VC को दिया जायेगा।

और नया शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस तरह होगा

SR.NO OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTOR40%
2ANGEL INVESTOR 20%
3VENTURE CAPITALIST10%

Sources of Business Finance : Stage 3 – Bank Loans for Businesses

आप व्यापर शुरू करना चाहते है तो बैंक से एक छोटा व्यवसाय ऋण (A Small Business Loan) आप ले शकते है।

किसी भी व्यापार के पास अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए व्यापार निधि की हमेशा आवश्यकता होती है।

और ऐसे में बैंक (Bank) से पैसे लेने का भी एक विकल्प होता है। और सभी बैंक व्यापार ऋण (Business Loan) लोन देती है।

ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक से लिया जाने वाला निधि (Fund) एक ऋण(Loan) होता है। जिसके ऊपर निश्चित दर से व्याज(Interest) चुकाना होता है।

और ऋण(Loan) को चुकाने का भी एक दबाव बना रहता है। जो कि बिज़नस के लाभ (Profit) को कम कर देता है।

इस तरह कंपनी के पास दुसरे स्रोतों (Sources) न होने पर बैंक से भी ऋण (Loan) लेती है। लेकिन एक निवेशक के लिए ध्यान देने वाली बात ये है।

कि बैंक से लिया जाने वाला व्यापार निधि (Business Fund) एक ऋण और कर्ज की तरह होता है।

और कंपनी के समापन की दशा में बैंक ऋण को चुकाना कंपनी की प्राथमिकता होती है।

साथ ही साथ किसी कंपनी के ऊपर ज़्यादा बैंक ऋण होने से उसकी लाभ कमाने की क्षमता में कम हो जाती है। और ये निवेशक के लिए अच्छी बात नहीं होती है।

Sources of Business Finance : Stage 4 – Private Equity (PE)

एक कंपनी के पास व्यापार वित्त पोषण (Business Funding) के लिए एक और विकल्प होता है, Private Equity , जिसे संक्षेप में PE भी कहा जाता है।

Private Equity को आप Venture Capitalist का बड़ा रूप समझ सकते है।

Private Equity आम तौर पर बड़ी-बड़ी निजी वित्त कंपनी (Private Finance Company) होती है। जो कि किसी बढ़ता हुआ व्यवसाय में निवेशक के तौर पर निवेश करना चाहते है।

और एक कंपनी जिसका व्यवसाय बढ़ता जा रहा है। उसे अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए और अधिक मात्रा में एक बड़े अनुपात में व्यापार वित्त पोषण की आवश्यकता होती है।

और ऐसे में कंपनी के पास Private Equity का एक विकल्प होता है।

अब हमने ऊपर जोउदाहरण देखा। उस में अगर Private Equity से भी निवेश के रूप में पैसा लेना हो तो एक बार फिर कंपनी की निवल मूल्य (Net Worth ) की गणना की जाएगी।

मान लेते है कंपनी ने अगले दो साल में और अधिक लाभ(Profit) कमाया है और अब कंपनी का मूल्यांकन या निवल मूल्य (Net Worth ) अगर 1 करोड़ हो जाता है।

तो ऐसे Private Equity को कंपनी में 10% शेयर के लिए 10 लाख रूपये निवेश करने होंगे।

और कंपनी का कुल शेयर होल्डिंग पैटर्न कुछ इस प्रकार होगा –

SR. NO OF SHARES OWNED BYSHAREHOLDING
1PROMOTOR 40%
2ANGEL INVESTOR 20%
3VENTURE CAPITALIST 10%
4PRIVATE EQUITY 10%

Sources of Business Finance : Stage 5 – The IPO (Initial Public Offering)

IPO- आईपीओ का हिंदी अर्थ – पब्लिक को कंपनी के शेयर खरीदने का आवेदन (सार्वजनिक प्रस्ताव)

IPO पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे।

Initial Public Offering ( IPO ) – आईपीओ क्या है।

यहाँ पर आईपीओ(IPO) को इस सन्दर्भ में समझना ज़रूरी है, की एक कंपनी को जब बहुत ही बड़ी मात्रा में व्यापार वित्त पोषण (Business Funding) की आवश्यकता होती-होती है।

तो उसे SEBI (Securities and Exchange Board of India) द्वारा बनाये नियम का पालन करते हुए जनता से पूंजी प्राप्त करने के लिए अपने शेयर को स्टॉक मार्केट पर लिस्ट करवाना होता है।

और स्टॉक मार्केट पर लिस्ट होने से पहले कंपनी को आईपीओ(IPO) लाना होता है।

आपको हमारी पोस्ट Sources of Business Finance कैसी लगी। कमेंट में जरूर बताइएगा।
धन्यवाद

Leave a Comment